छत्तीसगढ़ जिला जशपुर शिक्षा विभाग में संविदा पद की भर्ती | CG JASHPUR SHIKSHA VIBHAG SANVIDA BHARTI 2022


आवेदक को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / संस्थान से स्नातकोत्तर

परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

बी.एड. (विशेष शिक्षा )

बी.एड. (सामान्य) के साथ 2 साल का डिप्लोमा (विशेष शिक्षा) में

स्पेशल एजुकेटर के कर्तव्य एवं दायित्व:

1. विकासखण्ड एवं संकुलवार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का दिव्यांगतावार डाटा रखना । 2. चिन्हांकित विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का आवश्यकतानुसार सुविधा प्रदान करना।

3. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयार करना तथा उनका संपूर्ण रिकार्ड एकत्र कर रखना ।

4. इन बच्चों के पालकों को समय-समय पर बैठक लेकर उन्मुखीकृत करना तथा बच्चों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना। 

5. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना जैसे- छात्रवृत्ति,

सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दिव्यांगता भत्ता, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, एस्कार्ट ट्रांसपोर्ट, रीडर एलाउन्स, बालिका शिष्यावृत्ति, आदि ।

6. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के शिक्षण-प्रशिक्षण में सहयोग हेतु सामान्य शिक्षकों को आवश्यकतानुसार प्रशिक्षित करना ।

7. विभिन्न विभागों व एनजीओ से संपर्क कर विशेष आवश्यकता वाले / बच्चों को आवश्यकतानुसार सहायक उपकरण व अन्य लाभ की व्यवस्था कराना। 

8. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को व्यक्तिगत शैक्षणिक योजना (IEP) तैयार करने में शिक्षक का सहयोग करना, जिससे बच्चों में कितना परिवर्तन हो रहा है, उसका मूल्यांकन कर सके । 

CG JASHPUR SHIKSHA VIBHAG SANVIDA BHARTI 2022 | छत्तीसगढ़ जिला जशपुर शिक्षा विभाग में संविदा पद की भर्ती

9. शालाओं में पियर्स ग्रुप ( सहपाठी समूह ) तैयार करना जिससे वे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की मदद कर सके ।

10. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों हेतु शालाओं में बाधा रहित वातावरण निर्मित करने में शिक्षकों को प्रोत्साहित करना एवं उनकी संकल्पनाओं का निणर्य करना ।

11. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए पाठ्यक्रम अनुसार TLM का ही ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करना तथा नियमित कक्षा के अतिरिक्त बच्चों के समझ हेतु पृथक प्रयास करना ।

12. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की नियमित उपस्थिति व ठहराव पर नजर रखना व योजना बनाकर उपाय बनाना

13. शिक्षक को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समस्या एवं सामाधान के बारे में आवश्यक परामर्श देना तथा उनकी आवश्यकता के अनुकूल कक्षागत रणनीति व पाठ्यक्रम में उचित सुधार व सुझाव देना । 

14. विकासखण्ड में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों पर आधारित चलने वाले कार्यक्रम से फीडबैक लेकर सुधारात्मक उपाय बनाना । 

15. जनभागीदारी समिति ( SMC / SMDC ) मे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जानकारी देना व व उनके लिए निदानात्मक उपाय बनाकर लागू करना ।